समस्त ब्लॉग/पत्रिका का संकलन यहाँ पढें-

पाठकों ने सतत अपनी टिप्पणियों में यह बात लिखी है कि आपके अनेक पत्रिका/ब्लॉग हैं, इसलिए आपका नया पाठ ढूँढने में कठिनाई होती है. उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए इस लेखक द्वारा अपने समस्त ब्लॉग/पत्रिकाओं का एक निजी संग्रहक बनाया गया है हिंद केसरी पत्रिका. अत: नियमित पाठक चाहें तो इस ब्लॉग संग्रहक का पता नोट कर लें. यहाँ नए पाठ वाला ब्लॉग सबसे ऊपर दिखाई देगा. इसके अलावा समस्त ब्लॉग/पत्रिका यहाँ एक साथ दिखाई देंगी.
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका
Showing posts with label कौटिल्य का अर्थशास्त्र. Show all posts
Showing posts with label कौटिल्य का अर्थशास्त्र. Show all posts

8/11/07

कौटिल्य का अर्थशास्त्र: दुर्जन की संगति मरुस्थल समान

  1. चन्द्रमा और खिला हुआ कमल जिस तरह सरोवर के चित्त को प्रसन्न कर देता है उसी प्रकार सज्जन पुरुष की चेष्टा भी अन्य प्राणियों के हृदय को प्रसन्न कर देती है।
  2. सूर्य की तीव्र किरणों से तपते, शरीर को जला देने वाले मरुस्थल के समान दुर्जन व्यक्ति की संगति का त्याग कर देना ही मनुष्य के लिए श्रेयस्कर है।
  3. पर्वत के समन अचल पुरुष के भी अंतकरण में दुर्जन अकस्मात प्रवेश कर उनके मन को अग्नि के समान जला डालते है- और उन्हें भी पीडा देते हैं।
  4. जिनके श्वास से अग्नि के कण निकलते हैं, धूम्र से धुम्राय्मान मुख वारे सर्प की संगति अच्छी है पर दुर्जन की संगति अच्छी नहीं है।
  5. जो केवल आहार मात्र से ही चलता है, क्षणमात्र में ही दुःख से नष्ट हो जाता है। इस छायामात्र देह को जल के बुलबुले के समन ही जानना चाहिए जो कभी भी नष्ट हो सकती है।

हिंदी मित्र पत्रिका

यह ब्लाग/पत्रिका हिंदी मित्र पत्रिका अनेक ब्लाग का संकलक/संग्रहक है। जिन पाठकों को एक साथ अनेक विषयों पर पढ़ने की इच्छा है, वह यहां क्लिक करें। इसके अलावा जिन मित्रों को अपने ब्लाग यहां दिखाने हैं वह अपने ब्लाग यहां जोड़ सकते हैं। लेखक संपादक दीपक भारतदीप, ग्वालियर

विशिष्ट पत्रिकायें