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लेखक संपादक दीपक भारतदीप, ग्वालियर
भले के नाम पर-हिन्दी हाइकु
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ताबड़तोड़ वादे कर रहे हैं भूल जायेंगे, बड़े लोग हैं भले के नाम पर माल पायेंगे,
वादे शय हैं जिनको बेचकर पैसा लेना है, बिक जायेंगे ऊंचे दाम लेकर भूल
जायेंगे, खर...
सेवक होंगे स्वामी-हिन्दी हाइकु
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उनके पेट कभी नहीं भरेंगे जहरीले हैं, रोटी की लूट सारे राह करेंगे जेब के
लिए, मीठे बोल हैं पर अर्थ चुभते वे कंटीले हैं। ————– फिर आएंगे वह याचक बन
कुछ मांगे...
भीड़ और तन्हाई-हिन्दी शायरियाँ
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भीड़ का शोरशराबा देखकर अब अपनी तन्हाई की तड़प नहीं सताती है, कहें दीपक बापू
अकेलेपर से घबड़ाये लोग ढूंढते हैं मेलों में खुशी का सामान खरीदते ही हो जाता
जो पुर...
गणतंत्र (जनतंत्र) कितना सच कितना भ्रम-हिन्दी लेख
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गणतंत्र एक शब्द है जिसका आशय लिया जाये तो मनुष्यों के एक ऐसे समूह
का दृश्य सामने आता है जो उनको नियमबद्ध होकर चलने के लिये प्रेरित करता है। न
चलने...
भीड़ और तन्हाई-हिन्दी शायरियाँ
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भीड़ का शोरशराबा देखकर अब अपनी तन्हाई की तड़प नहीं सताती है, कहें दीपक बापू
अकेलेपर से घबड़ाये लोग ढूंढते हैं मेलों में खुशी का सामान खरीदते ही हो जाता
जो पुर...