समस्त ब्लॉग/पत्रिका का संकलन यहाँ पढें-

पाठकों ने सतत अपनी टिप्पणियों में यह बात लिखी है कि आपके अनेक पत्रिका/ब्लॉग हैं, इसलिए आपका नया पाठ ढूँढने में कठिनाई होती है. उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए इस लेखक द्वारा अपने समस्त ब्लॉग/पत्रिकाओं का एक निजी संग्रहक बनाया गया है हिंद केसरी पत्रिका. अत: नियमित पाठक चाहें तो इस ब्लॉग संग्रहक का पता नोट कर लें. यहाँ नए पाठ वाला ब्लॉग सबसे ऊपर दिखाई देगा. इसके अलावा समस्त ब्लॉग/पत्रिका यहाँ एक साथ दिखाई देंगी.
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका

8/7/09

ईमानदारी फिर कौनसी शय है-हास्य कविताएँ (imandari kaunsi shay hai-hasya kavita)

जैसे जैसे दौलत बढ़ती गयी
विश्वास कम होता गया।
वफादारी बिकती है बाजार में
फिर भी इंसान वफा से
महरूम होता गया।
................................
कहते हैं पैसे से बाजार में
सब मिलता है।
फिर भी खुश क्यों नहीं इंसान
दुनियां की हर शय मयस्सर है
गमों में डूबा दिखता है।
हर इंसान दिल की बात
कहते हुए रोते शब्द लिखता है।
.............................
सुना है बाजार में जो चीज कम दिखती
उसकी कीमत ऊंची मिलती।
कमबख्त! ईमानदारी फिर कौनसी शय है
जो लापता है फिर भी
किसी भाव में नहीं बिकती।
.........................

यह आलेख इस ब्लाग ‘दीपक भारतदीप का चिंतन’पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका
2.अनंत शब्दयोग
3.दीपक भारतदीप की शब्दयोग-पत्रिका
4.दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान पत्रिका
लेखक संपादक-दीपक भारतदीप

2 comments:

AlbelaKhatri.com said...

zabardast kaam !
anootha vyangya.....
badhaai !

परमजीत बाली said...

बहुत बढिया!!

हिंदी मित्र पत्रिका

यह ब्लाग/पत्रिका हिंदी मित्र पत्रिका अनेक ब्लाग का संकलक/संग्रहक है। जिन पाठकों को एक साथ अनेक विषयों पर पढ़ने की इच्छा है, वह यहां क्लिक करें। इसके अलावा जिन मित्रों को अपने ब्लाग यहां दिखाने हैं वह अपने ब्लाग यहां जोड़ सकते हैं। लेखक संपादक दीपक भारतदीप, ग्वालियर

विशिष्ट पत्रिकायें