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दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका

2/16/11

काले धंधे के खलनायक और सफेदपोश नायकों का गठजोड़-हिन्दी लेख (underworld and public's heero-hindi article)

पाकिस्तान का एक सूफी गायक राहत फतेह अली खान दिल्ली विमानतल पर अपने दो साथियों समेत सवा लाख की विदेशी मुद्रा अमेरिकी डालर के रूप में ले जाते हुए पकड़ा गया। पकड़ने वाली राजकीय जांच संस्था की उस पर बहुत दिन से नज़र थी-ऐसा बताया गया है। राहत फतेह अली पाकिस्तान के स्वर्गीय गायक फतेह अली खान का लड़का है और अपने पिता के नाम की लोकप्रियता का लाभ उठाने के लिये उसने अपने नाम से फतेह जोड़ रखा है। यह खबर कोई खास नहीं होती अगर कोई अन्य पाकिस्तानी पकड़ा जाता। तय बात है कि राहत फतेह अली खान ऐसे शिखर पुरुषों से संरक्षित है जो दोनों देशों में एक जैसा रुतवा रखते हैं और यह पैसे की ताकत का परिणाम है। राहत अली खान कोई सामान्य गायक होता तो भी शायद इतना महत्व नहीं होता, मुश्किल यह है कि भारतीय फिल्मों के शिखर पुरुषों का वह चहेता है और इसका प्रमाण यह है कि भारत में फिल्म फेयर अवार्ड में उसके यहां होते हुए उसका सम्मान दूसरे को दिया गया है। मतलब यह कि उसे भारत के फिल्म वालों की परवाह नहीं है पर इनको है।
राहत अली खान ने जो अपराध किया है उसकी कानूनी पेचीदगियों के बारे में अधिक नहीं पता पर इतना तय है कि वह ऐसा पहले भी करता रहा है। पहली बार पकड़ा गया है मगर उसका मसला आने वाले समय में तूल पकड़ सकता है। भारतीय मनोरंजन उद्योग में पाकिस्तानी गायकों, नायकों और शायरों की उपस्थिति पर अनेक राष्ट्रवादी आपत्ति उठाते हैं पर उनको सांप्रदायिक कहकर खारिज कर दिया जाता है। राहत अली के मामले से अपराध और आर्थिक क्षेत्र के गठजोड़ की पोल कहीं इससे खुली तो शायद हो सकता है कि पाकिस्तान से सांस्कृतिक संबंध रखने वालों की असलियत कुछ दूसरी ही निकले।
राहत अली खान के पकड़े जाने का समय भी कम दिलचस्प नहीं है। उसे फिल्म फेयर अवार्ड में सम्मानित भी किया गया। जहां तक हमारी स्मरण शक्ति है उसका सम्मान कोई दूसरा ही लेने आया था। तब सोचा था कि वह कहीं पाकिस्तान में वीजा वगैरह की समस्या के कारण रह गया होगा पर अब पता लगा कि वह तो देश के महानगरों में शादी के अवसर पर गाने गा रहा था। इन्हीं कार्यक्रमों में यह पैसा उसे डालर के रूप में मिला यह बताया गया है। यह बहुत बड़ा आर्थिक अपराध है। इसका मतलब यह है कि देश के कुछ आर्थिक शिखर पुरुष उसे संरक्षण दे रहे हैं।
एक सवाल यह भी आता है कि भारतीय रुपये में भुगतान क्यों नहीं हुआ? जवाब सीधा है कि पचास लाख के भारतीय नोट एक हजार या पांच सौ के रुप में दिये जाते और यह पता करना मुश्किल होता कि कितने असली हैं कितने नकली। पाकिस्तान में भारतीय मुद्रा का नकलीकरण होता है यह सभी जानते हैं। ऐसे में राहत भारतीय रुपये लेता और कहंी नकली होते तो पाकिस्तान में उसके शिखर पुरुष उसकी हालत खराब करते। राहत से जुड़े भारतीय शिखर पुरुष भी उसे अपने देश की मुद्रा देने में डरते होंगे कि कहीं  धन नकली हुआ तो पाकिस्तान में बैठे उनके आका उनकी हालत खराब कर देंगे।
राहत अली खान के पकड़े जाने से जिस तरह सन्नाटे में धूम मची वह भी कम दिलचस्प नहीं है। उसके बारे में पूछताछ भारत में ही कुछ खास लोग कर रहे हैं। हो सकता है कि कई लोगों की नींद हराम हो क्योंकि राहत अली खान गायक के रूप में वह मुखौटा है जो भारत और पाकिस्तान के काले धंधों के खलनायकों का प्रिय नायक है। इन काले धंधों के खलनायक सफेदपोशों के मनोरंजन के साथ ही उनके धन प्रबंधन का भी ख्याल रखते हैं। ऐसे में उनको डर है कि राहत अली की परेशानी भारतीय जांच एजेंसियों के लिये उनकी काली गुफा में घुसने वाला दरवाजा न मिल जाये। जहां से वह घुसें और काले धंधे के खलनायकों के साथ सफेदपोश नायकों के गठजोड़ की कहीं असलियत न देख लें।
भारतीय जांच एजेंसियां बहुत पहले से उस पर नज़र रख रही थीं। इससे एक बात तो साफ हो जाती है कि राजकीय स्तर पर कहंी न कहंी काले खलनायकों और सफेदपोश नायकों के गठजोड़ की औपचारिक जानकारी दर्ज है जिसके बारे में पहले अनुमान ही किये जाते थे।
भारत से भाग कर अनेक खलनायक पाकिस्तान के कराची में जाकर नायकत्व प्राप्त कर चुके हैं। कुछ ने तो बकायदा धर्म भी बदल लिया है। अपने भारत में बचे साथियों और दलालों के माध्यम से वह अपना अपराधिक वर्चस्व बनाये हुए हैं और भारतीय मनोरंजन उद्योग पर उनकी पकड़ यथावत है यही कारण कि फिल्म और टीवी चैनलों में पाकिस्तान के लोग घुस ही आते हैं। स्पष्टतः यह काले खलनायक सफेदपोश नायकों के माध्यम से पाकिस्तान की सरकार और सेना को खुश करते हैं। यह बताते हैं कि युद्ध में तो तुम भारत से नहीं जीत पाते पर मनोंरजन के माध्यम से वहां की जनता के दिल को बहलकर उस पर नियंत्रण कर लो।
राहतअली खान के पकड़े जाने के बाद एक भारतीय संगीतकार ने रहस्योद्घाटन किया कि भारतीय गायकों को तो चैक से भुगतान किया जाता है जबकि पाकिस्तानियों को नकद भुगतान किया जाता है। एक भारतीय गायक तथा संगीतकार तो बकायदा पाकिस्तानियों के प्रवेश पर आपत्तियां दर्जं कराते रहते हैं। इसके बावजूद सूफी कलाम की आड़ में पाकिस्तान के गायक और संगीतकार भारतीय फिल्मों और धारावाहिकों में घुस ही आते है। सूफी कलाम की खासियत यह है कि उसमें उंगली भगवान की तरफ उठाई जाती है पर दिल आशिक और माशुका को ही समर्पित रहता है। मतलब भक्त और आशिक दोनों ही एक गीत गा सकते हैं। दैहिक प्रेम में अध्यात्म ढूंढने का धोखा देने में सूफी दर्शन बहुत मददगार साबित होता है। मतलब यह है कि कोई लड़का इश्क का गीत घर में गाये और माता पिता टोके तो कह सकता है कि ‘मैं तो भजन गा रहा हूं।’
राहत अली खान के गीतों और सुर में कोई दम नहीं है पर जब अंधों में काना पुजवाना हो तो नेत्रहीनों के समाज में एक आंख वाले को खड़ा का दो। भारत के अनेक गायक है जिनका गाना अब कम सुनने को मिल रहा है। उदित नारायण, अभिजीत, सुदेश भौंसले और कुमार शानु के साथ दक्षिण भारत के हिन्दी गायकों के गाने अब कम ही सुनने को मिलते हैं। पाकिस्तान के राहत फतेह अली खान तथा अदनान सामी को ज्यादा अवसर मिल रहा है। अदनान सामी के भारत आने के बाद भारतीय गायकों को एक तरह से हाशिए पर डाल दिया गया है क्योंकि पाकिस्तानी आका के कहने पर उसे महान गायक जो दिखाना था। अदनान सामी पर भी आर्थिक गड़बड़ियों के आरोप लग चुके हैं। अब राहत अली खान का नाम आ गया है। राहत अली खान का मामला बहुत संगीन है। इसमें भारतीय मुद्रा की भारत में ही इज्जत न होने के संकेत मिलना भी चिंताजनक है। एक बाद याद रखें कि भारतीय रुपये की कीमत पाकिस्तानी रुपये से अधिक है और एक पाकिस्तानी को अमेरिकी डालर में भुगतान इस बात को दर्शाता है कि हमारे देश में पाकिस्तानियों की नफरत का भी सम्मान हो रहा है। यकीनन यह गायक और नायक भारतीय मुद्रा को अपने हाथ में लेना ही राष्ट्रद्रोह समझते हों यही कारण है कि उनको अमेरिकी डालर में भुगतान किया जाता हो। हालांकि जांच एजेंसियों के यह भी एक विषय होता है कि वह डालर आये कहां से?
आखिरी सवाल यह है कि भारत में मनोरंजन उद्योग तथा आर्थिक क्षेत्र के कुछ आर्थिक पुरुषों के सामने ऐसी कौनसी मज़बूरी है कि वह पाकिस्तान की बजाये जा रहे हैं। अगर वह सोचते हैं कोई इस बात को नहीं समझ रहा तो गलती पर हैं। सभी को पता है कि कौन है जो पाकिस्तान में बैठकर भारत में अपना आर्थिक तंत्र चला रहा है। उसके सामने जाकर भारत के दो उद्योगपति अपने झगड़े की पंचायत करा चुके हैं। राहत अली जैसे सामान्य स्तरीय गायक को जिस तरह भारत में सम्मान दिया जाता है उसकी पोल खुल गयी तो पता नहीं क्या क्या सामने आयेगा? अभी मामला लंबित है और पता नहीं इसका अंत कैसे होगा? भारतीय जनमानस की चिंता शायद किसी को नहीं है पर अंतर्राष्ट्रीय समाज इस पर नज़र रखेगा क्योंकि उसे पाकिस्तान जाने वाले लोग तथा धन दोनों को आंतक का साथी होने का शक होता है। राहत अली से गाना सुनकर भारत के कुछ शिखर पुरुष आत्ममुग्ध हो सकते हैं पर विश्व समुदाय ऐसा नहीं सोचेगा। दूसरा यह भी कि जब पाकिस्तान अपने गायक के लिये इस तरह दबाव डालता दिखाया जा रहा है कि जैसे उसे छोड़ना मज़बूरी है तो फिर कुछ लोग पूछ सकते हैं कि ऐसा ही दबाव उस देश के अपराधियों को भारत भेजने के लिये क्यों नहीं डाला जाता?
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लेखक संपादक-दीपक ‘भारतदीप’,Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com
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1 comment:

शिवा said...

बहुत सुंदर लेख ..
दीपक जी कभी समय मिले तो http://shiva12877.blogspot.com ब्लॉग पर भी अपने एक नज़र डालें . धन्यवाद .

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