समस्त ब्लॉग/पत्रिका का संकलन यहाँ पढें-

पाठकों ने सतत अपनी टिप्पणियों में यह बात लिखी है कि आपके अनेक पत्रिका/ब्लॉग हैं, इसलिए आपका नया पाठ ढूँढने में कठिनाई होती है. उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए इस लेखक द्वारा अपने समस्त ब्लॉग/पत्रिकाओं का एक निजी संग्रहक बनाया गया है हिंद केसरी पत्रिका. अत: नियमित पाठक चाहें तो इस ब्लॉग संग्रहक का पता नोट कर लें. यहाँ नए पाठ वाला ब्लॉग सबसे ऊपर दिखाई देगा. इसके अलावा समस्त ब्लॉग/पत्रिका यहाँ एक साथ दिखाई देंगी.
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका

4/24/07

गर्मी में ठंडा, गले से पंगा-व्यंग्य

गर्मी में ठंडा यानी अपने गले से पंगा। मजाक लगने वाली यह बात मेरे लिए एकदम सही बैठती । ऐसा कई बार हुआ है जब मैं गर्मी में कभी ठंडे पानी का सेवन करता हूँ मेरे गले में खराश होने लगती है और फिर लगता है ज़ुकाम और बुखार है। कल तेज गर्मी में स्कूटर पर सवार होकर मैं ऑफिस पहुंचा और अपने काम में मशगूल हो गया , कुछ देर बाद पानी पिलाने वाला आया और मेरी टेबल पर भरा ग्लास रख दिया, मैंने न चाहते हुए भी उस गटक लिया । फ्रिज का होने के कारण पानी एकदम ठंडा था , हालांकि मुझे ठंडा पानी पीना पसंद नहीं है पर चूंकि पानी लेकर लड़का पास ही आ गया तो फिर उसे मना करने में ठीक नहीं लगता। मैं अपने काम में लगा रहा, करीब आधे घंटे बाद फिर वह पानी लेकर आया फिर मैंने अपनी उदारता का परिचय देते हुए गटक लिया और लड़के से कहा"यार , इसमे कुछ गर्म पानी मिला लिया करो , इतना ठण्डा मुझे पीया नहीं जाता। वह बोला-"साहब लोग तो इससे भी ठंडा पानी पिलाने के लिए कहते हैं। "वह चला गया तो मैं सोचने लगा या तो मेरे शरीर में ही कोई गड़बड़ है या फिर लोग के या फिर यह लड़का मुझे चला रहा है। उसके जाने के बाद पांच-दस मिनट में मुझे अपने गले में खराश अनुभव होने लगी और फिर लगा के मेरे फैफदों में बलगम जमा हो रहा है, मुझे यह समझते देर न लगी कि मैंने अपने गले में ठंडा डालकर उससे पंगा मोल ले लिया है। एक घंटे बाद लड़का फिर आया पर मैंने उससे ग्लास वापस करते हुए कहा-"मेरे लिए ठंडा पानी कभी मत ले आना।"कुछ देर बाद एक आवश्यक कार्य से मैं कम्प्यूटर कक्ष में गया, वहां जाकर एक कम्प्यूटर पर अपना काम शुरू किया तो देखा जो पास में सज्जन बैठें है वह अपने गले को साफ कर रहे थे, मैंने उनसे पूछा-"सुबह से कितने ग्लास ठंडे पाने के पी चुके हो ?"वह एकदम चौंक कर बोले-" छ: ग्लास पी चुका हूँ, पर तुम क्यों पूछ रहे हो?"मैंने कहा-"बस ऐसे ही।"वह बोले-"अब मैं समझा! मुझे एकदम ज़ुकाम क्यों हो गया? यार अब मैं कभी ठंडा पानी नहीं पीयूँगा। घर पर जबसे फ्रिज आया है गर्मियों में मुझे ज़ुकाम हो जाता है। मैंने कहा-"मुझे तुम्हारा तो पता नहीं पर मैंने अपने जीवन में लंबा समय बिना कूलर और फ्रिज के निकाला है तो अब मुझे सूट नहीं करते, गर्मी में जब तक मेरे शरीर से पसीना न निकले तब तक मैं अपने को बीमार महसूस करते हूँ । आज चूंकि सारा दिन कूलर या ऎसी.में निकालना है ही तो शाम तक मुझे बुखार भी आयेगा।उन सज्जन ने मुझे लक्जरी आइटमों के तमाम दोष गिनाए पर मैं जानता था कि इससे कोई परिणाम नहीं निकलने वाला। आप ऑफिस या घर में कहीं भी न तो अकेले रहते है और न ही समर्थ होने के बावजूद अपने मन से फैसले लेने सक्षम होते है। जब शुरू में फ्रिज आया था तो मैंने देखा कि मुझे आये दिन ज़ुकाम होता था, और वह इतना कहर बर्पाता था कि भीषण गर्मी में भी मैं परेशान हो जाता था। एक दिन अखबार में जब फ्रिज के बारेमें दोषों को पढा मैं उसी दिन जाकर मटका ले आया और यकीनन उसके बाद मुझे जुकाम से निजात मिल गयी, जो चीजें लोगों को सुख देती हैं वही मुझे काटती हैं । छुट्टी के दिनों में जब मैं सायकिल पर बाहर जाता हूँ तो लोग हसते हैं और कहते हैं-"यार पैट्रोल के पैसे बचा रहे हो। "और ऐसा कहने वाले वह लोग होते हैं जो एक टांग उठाते हैं तो दूसरी कब उठेगी यह पता नहीं लगता। हांफते हुए चलते हैं और अपनी दवा किसी डॉक्टर के यहां से ला रहे होते हैं। मैं हंसता हूँ । एक दिन एक लड़के ने मुझसे कहा-"आप सायकिल पर क्यों चलते हैं ?आपके पास स्कूटर है और लोग सोचते हैं किआप कजूस हैं! मैंने कहा -"तुम जिम में जाकर सायकिल भी चलाते हो और फ़ीस भी देते हो कम से कम मैं इससे तो बचा हुआ हूँ। "एक दिन वही लड़का मोटर सायकिल पर एक डॉक्टर के यहाँ से दवा लेकर लॉट रहा था, मेरे पूछने पर बोला,कल शादी मैं गया था तो वहां खाने के बाद जमकर ठंडा पानी पी लिया और आज तेज ज़ुकाम हो गया है डाक्टर ने ठंडा पीने से मना किया है। अब आप हे बताईये एसी गर्मी में बिना ठंडे के का कैसे रहा जा सकता है?मैंने हसते हुए कहा-"रहा जा सकता है न! ठंडा पीकर ज़ुकाम के साथ।

2 comments:

अतुल शर्मा said...

अच्छा लिखा है। सायकल ही चलाते रहें।

संजय बेंगाणी said...

मटके का ठंडा पानी पीयें कुछ नहीं होगा. आजमाया हुआ है. क्या है कि हमारे गले को भी ठंडे पानी से नफरत है, तुंरत प्रतिक्रिया देता है :)

हिंदी मित्र पत्रिका

यह ब्लाग/पत्रिका हिंदी मित्र पत्रिका अनेक ब्लाग का संकलक/संग्रहक है। जिन पाठकों को एक साथ अनेक विषयों पर पढ़ने की इच्छा है, वह यहां क्लिक करें। इसके अलावा जिन मित्रों को अपने ब्लाग यहां दिखाने हैं वह अपने ब्लाग यहां जोड़ सकते हैं। लेखक संपादक दीपक भारतदीप, ग्वालियर

विशिष्ट पत्रिकायें