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दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका

10/6/07

क्या हिंदी में लिखना कठिन है


'क्या इन्टरनेट पर हिन्दी लिखना मुश्किल है?' अगर कोई मुझसे पूछता है तो मैं कहता हूँ कि बिल्कुल नहीं मैं तो हिन्दी में ही लिख रहा हूँ। दिलचस्प बात यह है कि अगर मेरे ब्लोगर मित्रों का कोई टूल मेरे काम नहीं आया और मैं उसी रास्ते पर चल रहा हूँ जिस पर पहले चल रहा था-वह लोग मुझे तभी प्रेरित कर सके जब मेरे अन्दर इन्टरनेट पर लिखने की इच्छा थी और अब भी उन्हीं लोगों को ला पायेंगे जिनकी एसी इच्छा है ।
शुरूआत में मुझे किसी ने नहीं बताया कि गूगल का हिन्दी टूल भी है जिससे हिन्दी में लिखा जा सकता है। वह तो मेरे हाथ लग गया और मैने लिखना शुरू किया। उस पर भी कभी तो हिन्दी टूल तो कभी टाईप राइटर लोड कर मैं अपने कंप्यूटर को ही तकलीफ देता रहा हूँ। मुझे लगता है मुझमें कंप्यूटर का ज्ञान नहीं है तो जो लोग दिशा निर्देशन कर रहे हैं उनमें भी कहीं न कहीं देश में हिन्दी के लोग किसे तरह काम करते हैं उसे जानते हुए भी भूल रहे हैं-यह अब तक हुई चर्चाओं से मुझे लगा है।

पहले तो मैं या बता दूं कि देश के अधिकाश लोग हिन्दी के गोदरेज टाईप राइटर पर भी टाईप करते हैं और रेमिंगटन यहाँ से विदा हुए ही बरसों हो गये हैं। मैने अभी एक टाईप राइटर टूल लोड किया तो पता लगा कि वह अपनी भाषा ही बदल बैठा और मुझे फोरमेट कराना पडा। उस समय तो मैं घबडा गया जब आर की जगह पी और डी की जगह ई टाईप होने लगा-तकनीकी ज्ञान न होने की वजह से यह पता नहीं चल पाता कि गलती कहाँ हुई । अगर आप मुझसे सच पूछें तो अभी भी गूगल के टूल से अधिक कोई टूल नहीं फला। एक टूल लाया था पर फोरमेट करने के बाद उसे दोबारा लाने का विचार नहीं किया-हालांकि अगर तसल्ली से लिखने के लिए वह टूल भी उपयोगी था पर फिर भी वह गूगल जैसा उपयोगी नहीं था। बड़ी रचनाओं कही अन्य टाईप कर वहाँ उसे हिन्दी में करना ठीक लगता है पर आखिर गूगल का ही टूल ही उसको पूरी तरह शुद्ध कर सकता है-यहाँ याद रखने वाली बात यह है कि गूगल को टूल सौ शब्दों से अधिक को हिन्दी में नहीं बदलता।

मैने अपनी कुछ बड़ी रचनायें उस पर लिखीं तो भाई लोग लिखने लगे इतनी बड़ी रचनाएं मत लिखो-तब मैं सोचता हूँ कि जब मुझ पर कम से कम ढाई सौ शब्दों का ही बोझ है तो उसके लिए गूगल का टूल क्या बुरा है। हिन्दी का टूल आयेगा- मैं इस पर यकीन करता हूँ । क्योंकि हमारे देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, हो सकता है कि हमारी नज़रों परे होकर कोई इस पर काम कर रहा हो।
जब लोग कहते हैं कि हिन्दी लिखना अभी कठिन है तो मैं हंसता हूँ। अच्छा खासा लिख रहे है और कहते हैं कि हिन्दी लिखना कठिन है। कोई टूल आयेगा या नहीं इस बहस को कोई नया आदमी सुने तो यही सोचेगा कि अभी हिन्दी लिखना कठिन है और उसका मनोबल गिर जायेगा। वैसे इसमें कोई शक नहीं है कि अगर अलग से टूल आ जाये तो बहुत अच्छा है पर अगर गूगल का टूल है तो लोगों को उसके बारे में बताएं, और उन्हें गूगल पर एक ब्लोग बनाने के लिए प्रेरित करते जाएँ। मुझे ताज्जुब है कि जब लोग मेरे सादा हिन्दी फॉण्ट में लिखे को नहीं पढ़ पा रहे थे तब तमाम तरह के विचार दे रहे थे पर किसी ने यह नहीं कहा कि त गूगल पर ब्लागस्पाट काम पर ब्लोग बनाकर काम चलाओ-हालांकि गूगल खुद ही इसके लिए लोगों प्रेरित कर रहा है बस उन्हें ध्यान दिलाने की जरूरत है। साथ ही उन्हें अन्य उपलब्ध टूलों के बारे में भी बताये फिर उन्हें तय करने दें कि वह अपना काम किस तरह करेंगे।

अब सवाल यह कि टूल चाहिऐ कि हिन्दी में लिखना है। जिसे लिखना है तो उसे आज का भी टूल बता दीजिए तो वह सहर्ष लिखेगा और जिसे नहीं लिखना उसे आप नए और सरल टूल दे दीजिए फिर भी नहीं लिखेगा। जिस टूल की बाते कर रहे हैं उससे भी कोई फर्क नहीं पड़ने वाला जब तक हम लोगों को जानकारी नहीं देते कि हिन्दी में लिखा जा सकता है। अच्छे खासे सॉफ्ट इंजीनियर तक हिन्दी के टूल के बारे में तो छोडिये ब्लोग के बारे में भी नहीं जानते अपने संघर्ष के दिनों में मैने यह देखा है। यह सब बकवास मैं इसलिये लिख रहा हूँ कि कुछ लोग निराश होकर रोमन लिपि में हिन्दी लिखने की बात कर रहे हैं तो क्या आपने उन लोगों को बताया है कि अब हिन्दी में भी लिखा जा सकता है और उसके कई तरीके है। दो तीन ब्लोग तो मैने खुद देखे हैं जो रोमन में हिन्दी लिखते हैं और मैं सोचता हूँ कि पता नहीं उनको देवनागरी लिपि नहीं आती या उनको हिन्दी टूल उपलब्ध नहीं है।

कोई आधुनिक और सरल टूल की प्रतीक्षा किये बग़ैर अपने देश के लोगों को उपलब्ध टूलों की जानकारी देते रहिए। मेरे विचार से अगर इस बारे में औपचारिक रूप से शिविर आयोजित किये जाएँ तो बहुत अच्छा रहेगा। एक संगठन बनाएं और कंप्यूटर की ट्रेनिंग देने वाले संस्थाओं से कहें कि अगर वह अपने प्रशिक्षणार्थियों को ब्लोग बनाने का व्यावाहरिक ज्ञान दिलाना चाहते हैं तो हम वरिष्ठ ब्लोगर उपलब्ध हैं। चूंकि कई वरिष्ठ ब्लोगर इस प्रयास में हैं कि इस देश में हिन्दी ब्लोग बनाए जाना चाहिऐ तो उन्हें यह प्रयास भी करना होगा। मेरा वरिष्ठ ब्लोगारों से विनम्र आग्रह है कि अब इधर उधर लिखने के साथ इसे जमीन पर भी उतारने की योजना पर काम करें । लोग उनके नाम अब पत्र-पत्रिकाओं की वजह से जानते है तो प्रेरित भी होंगे- सब नहीं तो जिनको इन्टरनेट पर हिन्दी में लिखने की इच्छा है वह बहुत खुश होंगे। वैसे भी जिस टूल की बात वह कर रहे हैं वह तो चैट करने के लिए बहुत जरूरी है-जहाँ तक लिखने का सवाल है तो मुझे तो कोई दिक्कत नहीं आ रही है-फिर दूसरों को क्यों आयेगी यह मेरी समझ से परे है। हो सकता है कि नया होने की वजह से मुझे कम जानकारी हो अपने विवेक और अनुभव से जो देखा उसे ही लिख रहा हूँ ताकि अधिक से अधिक ब्लोग लेखक आगें आयें। मैं यह नहीं भूलता कि वरिष्ठ ब्लोगारों ने मुझे जिसे तरह प्रेरित कर मदद की और मैं चाहता हूँ कि वह अपने प्रयास इसी तरह जारी रखें।

2 comments:

Shrish said...

आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि गूगल का इण्डिक ट्रांसलिट्रेशन टूल अब ब्लॉगर से अलग से भी उपलब्ध है।

http://www.google.com/transliterate/indic/

Ayush said...

गूगल का यह टूल भी बहुत अच्छा है | और काफी टूल्स भी है |
आप फॉण्ट भी प्रयोग कर सकते है , इसके लिए आपको यू . टी . ऍफ़ समझना होगा
हिन्दी वेबसाइट की संख्या भी बढती जा रही है
आज कल काफी कम्पनियाँ भी हिन्दी टूल्स लॉन्च कर रही है
http://gostats.in

वंदे मातरम

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