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दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका

7/18/07

परमजीत जीं का ब्लोग दिशाएं पठनीय

मेरे प्रिय मित्र परमजीत बाली ने पुन: लिखना शुरू किया है यह मेरे लिए ख़ुशी की बात है। बहुत दिन से मैं उनके विषय में लिखना चाहता था पर अच्छा हुआ नहीं लिखा क्योंकि तब मैं पीडा से भरा होता तो पीडा ही बिखेरता पर और वह सब नहीं लिख पाता जो लिख रहा हूँ , दिशाएं में उनकी नीचे लिखी पंक्तियों से एक ऐसा संदेश है जो सार्वभौमिक सत्य को उजागर को उजागर करता है। इसे जानता हर कोई है पर जीना भुलावे में सभी को अच्छा लगता है।



मै भी ना यहाँ कल होऊंगा
तुम भी ना यहाँ रह पाऒगे
मिलकर बैठे तो झूम लेगें
व्यथित अकेले गाऒगे।

परमजीत जीं दो करीब दो-ढाई महीने पहले तक मुझे अपनी हर पोस्ट पर अपने कमेन्ट दीं। मैं जब भी उनके ब्लोग पर जाता तो वहां कमेन्ट देने वालों की भीड़ लगी रहती थी मैं सोचता यार कमाल है कि इनको लोग पढ़ते हैं। उनकी रचनाएं लोकप्रिय लेख में अच्छी स्थिति में होती थी, तब एक बात मुझे लगती थी कि वह लेखन के साथ लोगों को व्यक्तिगत रुप से भी प्रिय हैं, इसका कारण है वह निष्काम भाव से दूसरों उत्साहवर्धन करते हैं और ऐसा भाव विरलों में ही दिखाई देता है ,



कई बार ऐसा भी हुआ कि उनकी रचना आयी और मैं तत्काल कमेन्ट दे आया और मुझे पता था कि यह आज फिर हिट होगी। कई बार रचनाएं मुझे ठीक-ठाक लगीं फिर भी वह हिट ही रहती थीं। मैंने कई बार कमेन्ट नहीं दीं और फिर ब्लोग पर भी कम जाने लगा, क्योंकि मुझे लगा कि वह शायद लोबी के साथ जुडे हैं, पर एक दिन मैं उनके ब्लोग पर गया तो उनकी रचना ने हतप्रभ कर दिया और मुझे लगा कि मैं अनजाने में ही पूर्वाग्रह पाले बैठा था। उनकी कविताओं में हूबहू मेरी आन्तरिक भावनाओं का प्रतिबिम्ब दिखाई दिया। फिर तो मैंने उनके ब्लोग को पूरा देखा और लगा कि यह तो मेरे जैसा ही है। मैंने बहुत लेख देखे हैं उनको पढा है पर वैचारिक धरातल पर इतनी समानता मेरी किसी अन्य लेखक के साथ आज तक मुझे कभी दिखाई नहीं दीं।




लिखने वह एकदम बेबाक हैं , मुझसे कहीं ज्यादा स्पष्टवादिता उनकी रचनाओं में दिखाई देती है। एक बार मेरे ब्लोग पर एक पोस्ट पर एक ही कमेन्ट थी मैंने सोचा कि अपना हौंसला बढाने के लिए परमजीत बाली को धन्यवाद दे दूं। उसके बाद मैंने उस पर दूसरी पोस्ट डाली। परमजीत जीं ने शायद पहली पोस्ट का निरीक्षण किया होगा और लिखा कि आप सक्षम लेखक आपको किसी होंसले की जरूरत नहीं है। जबकि वह वाकई अपनी कमेन्ट से मेरा उत्साह बढ़ाते थे।



मुझे जो प्रसन्नता मिली वह एक सप्ताह से ज्यादा नहीं रही और यह महाशय परिदृश्य से एकदम गायब हो गये और मेरी रचनाएँ बेरंग लौटने लगी तो मैं इनके ब्लोग पर गया तो देखा कि वह स्वयं ही नही लिख रहे , मैंने सोचा कि कोई काम होगा, पर करीब दो महीने तक कुछ हलचल नहीं दिखाई दीं, इस बीच एक कमेन्ट भी व्यक्तिगत रुप से दे आया इस संदेश के साथ कि इसे डीलिट कर देना क्योंकि हालचाल पूछने वाली कमेन्ट ब्लोग पर दिखाईं देना ठीक नहीं है । जब कोई जवाब नहीं आया तो मैंने सोचा कि इनका पता लगाने के लिए एक पोस्ट लिखूं या किसी ऐसे मित्र को ईमेल करूं जो इनकी जानकारी दे सके। मैंने मित्र ढूँढा और सोचा कि मौका देखकर अपनी बात उनसे कह दूं पर हुआ यह कि एक दिन सुबह मेरी एक पोस्ट पर कमेन्ट के साथ दोनों मौजूद थे।उस समय जो मुझे प्रसन्नता हुई वह शब्दों में बयान नहीं की जा सकती।



मैंने तुरन्त परमजीत जीं का वहीं से ईमेल का पता निकाला और संदेश भेजा धन्यवाद देने के लिए नही बल्कि कि उनके न दिखने की वजह पूछने के लिए। उनके स्वभाव की निच्छ्लता उनकी कमेन्ट और लेखन में साफ झलकती है। उनका ब्लोग दिशाएं हिंदी और पंजाबी में हैं और उनकी रचनाओं को भावनात्मक रुप से देखें तो समाज में फैली विषमता, असहिष्णुता और ढोंग से उपजी पीडा साफ दिखाई देती हैं ।



मैं यह क्यों लिख रहा हूँ? इसका जवाब है कि यह एक कहानी की तरह है कि लोग किस तरह अनायास बिना देखे और बोले केवल शब्दों से ही एक दुसरे के मित्र बन जाते हैं । क्या यह संबंधों के उतार -चढ़ाव का एक उदाहरण नहीं है जिन परमजीत बाली को हिट देखकर मैं उनकी परवाह नहीं करता था उन्हें लिखता देखकर मुझे प्रसन्नता होती है।मैं चाहता हूँ कि वह अपनी बेहतर रचनाओं को निरन्तर लिखते रहें , मुझे उनको पढने में मजा आने लगा है। उनकी ऊपर लिखीं पंक्तिया उनके ब्लोग दिशाएं में प्रकाशित है और मेरा मानना है कि वह ब्लोग काव्य और लेखन की दृष्टि से पठनीय है।

3 comments:

अनूप शुक्ला said...

अपने और् परमजीत बाली जी के संबंधों पर् अच्छा लिखा। पैराग्राफ़् थोड़े छोटे-छोटे कर् के लिखें तो पढ़ने में आसानी रहेगी। :)

Udan Tashtari said...

बढ़िया लगा आपकी बात सुनकर. परमजीत जी का लिंक भी लगा दें लोगों की सुविधा के लिये. हम तो उनके रेग्यूलर पाठक हैं, तो हमें जुबानी याद है. :)

Sanjeeva Tiwari said...

सही लिखा है परम्जीत बाली जी साधुमना व्यक्ति है !

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