समस्त ब्लॉग/पत्रिका का संकलन यहाँ पढें-

पाठकों ने सतत अपनी टिप्पणियों में यह बात लिखी है कि आपके अनेक पत्रिका/ब्लॉग हैं, इसलिए आपका नया पाठ ढूँढने में कठिनाई होती है. उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए इस लेखक द्वारा अपने समस्त ब्लॉग/पत्रिकाओं का एक निजी संग्रहक बनाया गया है हिंद केसरी पत्रिका. अत: नियमित पाठक चाहें तो इस ब्लॉग संग्रहक का पता नोट कर लें. यहाँ नए पाठ वाला ब्लॉग सबसे ऊपर दिखाई देगा. इसके अलावा समस्त ब्लॉग/पत्रिका यहाँ एक साथ दिखाई देंगी.
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका

11/6/07

हकीकत

जिस विश्वास को पाले रहते हैं
कई बरस तक मन में
जब टूट कर बिखरते हैं कांच की तरह
डूब जाते हैं गम में
कुछ भ्रम होते हैं
जिन्हें हम विश्वास का नाम देते हैं
किसी प्रमाण के बिना हम अजनबियों को
आत्मीय होने का नाम देते हैं
किसी के अपन होने का
अपने को खूब दिलासा दें
हकीकत यह है कि
सैर करने के लिए कई लोग मिलते हैं
पर हम अकेले ही होते हैं चमन में

2 comments:

prabhakar said...

बिल्कुल सही
हम अकेले ही होते हैं

Udan Tashtari said...

सही कहा-निपट अकेले.

हिंदी मित्र पत्रिका

यह ब्लाग/पत्रिका हिंदी मित्र पत्रिका अनेक ब्लाग का संकलक/संग्रहक है। जिन पाठकों को एक साथ अनेक विषयों पर पढ़ने की इच्छा है, वह यहां क्लिक करें। इसके अलावा जिन मित्रों को अपने ब्लाग यहां दिखाने हैं वह अपने ब्लाग यहां जोड़ सकते हैं। लेखक संपादक दीपक भारतदीप, ग्वालियर

विशिष्ट पत्रिकायें